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लीक से हटकर









































































षड्यंत्रकारी

वीरेन्द्र कुमार



षडयंत्रकारी

लोगों से कटे हुए होते हैं

हैं कि नहीं परमात्मा जी


वैसे तो तुझे सब पता है

पर मैं बड़े बड़े षडयंत्रकारियों के

नाम गिनाऊं

तो चौंकना मत परमात्मा जी


बोल गिनाऊं


तू अभय दान दे तो गिनाऊं


ठीक है

तू कहता है

तो बताता हूँ

सबसे अव्वल है भाजपा

यूं कांग्रेस भी कम नहीं रही

तीसरे नंबर पर हैं तुलसीदास

परमात्मा जी अब तू

अपने भक्तों को रोके रहियो

इन्हीं से मुझे खतरा है बेहद्द


चौथे पर तीन वर्णों के लोग

ब्राह्मण क्षत्रिय और वैश्य

जो अपने वर्ग हित से चिपके हैं

केवल वही परमात्मा जी

जो अपने वर्ग हित से चिपके हैं

मानो लगी है उन्हें महादेव की चिप्पक


अब यह तो है ना परमात्मा जी

दूसरे वर्ग के हित को समझने के वास्ते

अपने वर्ग हित से दूर जाना पड़ता हैं

वरना शूद्रों का उद्धार कैसे होगा

जबकि वे साढ़े चौहत्तर प्रतिशत हैं

स्त्रियों का उद्धार कैसे होगा

वे हैं पचास प्रतिशत


और अगर दोनों को मिला दिया जाए

तो हो जाते हैं सत्तासी प्रतिशत

बाकी तेरह प्रतिशत में आते हैं सात प्रतिशत मुसलमान पुरुष

तीन प्रतिशत सिख बौद्ध ईसाई पुरुष

बाकी बचे तीन प्रतिशत तीन वर्णों के पुरुष


जी हाँ परमात्मा जी

भारत में ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्यों के

तीन प्रतिशत पुरुषों का बोलबाला है

बाकी को देश निकाला है


ये तीन वर्णों के तीन प्रतिशत पुरुष

तय करते हैं क्या है भारतमाता

क्या है राष्ट्रप्रेम

क्या है संसद और संविधान की मर्यादा

पुलिस का कर्तव्य

फौज के अधिपति

और न्यायालयों की आत्मा


इन तीन प्रतिशत पुरुषों में

आधे तो बच्चे भी हैं ना अबोध

तो डेढ़ प्रतिशत ही रह जाती है इनकी संख्या


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